बीकानेर। सरकारी अस्पतालों से गैर हाजिर चल रहे डॉक्टर्स की जल्दी ‘छुट्टीÓ हो सकती है। जिले में करीब सात आठ चिकित्सकों पर गाज गिर सकती है। ऐसे डॉक्टर्स पर कार्रवाई के लिए चिकित्सा विभाग ने टाइमलाइन तय की है। अधिकांश क्षेत्रों से शिकायतें आ रही थी कि डॉक्टर अस्पताल जाने के बजाय घर पर ही प्रेक्टिस करते हैं। इनमें ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाएं देने वाले डॉक्टर अधिक हैं।अब विभाग की ओर से टाइमलाइन के अनुसार मर्जी से अनुपस्थित चिकित्सकों के खिलाफ पहले अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी, इसके बाद ही उसका अवकाश स्वीकृत किया जाएगा। अगर यह प्रमाणित नहीं होता है कि चिकित्सक किसी आवश्यक कार्य के चलते अनुपस्थित है, तो उसका सिर्फ असाधारण अवकाश ही स्वीकृत किया जाएगा। साथ ही अधिकारियों को गैरहाजिर डॉक्टर्स क ी सूची जनवरी और जुलाई माह में मुख्यालय को भेजनी होगी। कई डॉक्टर प्रोबेशन पीरियड से पहले ही छुट्टी पर कई डॉक्टर्स प्रोबेशन की 6 माह की सेवा से पहले ही स्वैच्छिक अवकाश पर चले गए। अब उनकी पुरानी सेवा को निरस्त माना जाएगा। ऐसे डॉक्टर्स की सेवा नई जॉइनिंग से ही मानी जाएगी, यानि कि प्रोबेशन काल फिर से शुरू होगा। साथ ही जो चिकित्सक प्रोबेशन की 6 माह की सेवा के बाद बगैर सूचना नौकरी से नदारद रहेंगे, उनकी प्रोबेशन अवधि बढ़ाई जाएगी और सीसीए नियमों के तहत कार्रवाई भी होगी। प्रोबेशन काल में एक साल से अधिक समय तक गैरहाजिर डॉक्टर्स की सेवाएं समाप्त की जाएगी।
विभाग ने तय की टाइमलाइन
कोई डॉक्टर दस दिन तक बिना सूचना गायब है तो उसे मुख्यालय को लिखित में जबाव देना होगा। एक माह तक नहीं आने पर अधिकारियों को संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव सरकार को भेजना होगा। ऐसा नहीं करने पर जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई होगी। अपनी मर्जी से अनुपस्थित रहे डॉक्टर्स पर विभिन्न धाराओं और सीसीए नियमों के तहत कार्रवाई होगी। एक साल से अधिक समय तक गैरहाजिर रहने पर सेवा समाप्ति की प्रक्रिया शुरू होगी।