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खुलासा न्यूज,बीकानेर। नर्सिंगकर्मी किसी के बस में नहीं है। हमें तो इनसे हाथ जोड़ के काम कराना है। ये तो प्रिंसिपल साहब के ताबे नहीं आते है। यह कहना है कि पीबीएम के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ बी के गुप्ता का। जिन्होंने अस्पताल में भर्ती एक मरीज के परिजन को मोबाइल पर बातचीत के दौरान अस्पताल प्रशासन की असहाय स्थिति को उजागर की। डॉ गुप्ता का यह ऑडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। खुलासा के पास पहुंचे इस ऑडियो में डॉ गुप्ता न सिर्फ नर्सिग स्टॉफ के बेकाबू होने का जिक्र कर रहे है। बल्कि सफाईकर्मी,चपरासी भी किसी के कहने में नहीं है। डॉ गुप्ता क ा कहना है एक समय था कि नर्सिगकर्मी जबाबदेही थे और जिम्मेदारी से काम करते थे। किन्तु अब यह किसी के कहने सुनने में नहीं है। इनको हाथ जोड़कर ही काम निकलवाना पड़ता है।
ग्लूकोज बंद करने की बात पर दिया था उलाहना
ऑडियो में विक्रम ने डॉ बी के गुप्ता को नर्सिग स्टॉफ द्वारा ग्लूकोज बंद होने के बाद की स्थिति का हवाला देते हुए उलाहना दिया। जिस पर गुप्ता ने पहले तो विक्रम को ही इस तरह फोन न करने की सीख दे डाली। बाद में राउण्ड लेते समय इस तरह की शिकायत करने की बात कहते हुए अपनी मजबूरी को अरोडा के सामने उजागर किया। डॉ गुप्ता को जब अरोडा ने किसी प्रकार की कार्यवाही करने की बात कही तो डॉ गुप्ता ने पल्ला झाड़ते हुए कह दिया कि इनका अलग से यूनिट बना है। वे ही सब कुछ देखते है। यानि एक जिम्मेदार चिकित्सक होने के नाते उन्होंने नर्सिगकर्मी पर किसी भी कार्यवाही से बचने का प्रयास किया। यही नहीं डॉ गुप्ता ने यह तक जानने का प्रयास नहीं किया कि आखिर ऐसा किस नर्सिगकर्मी ने किया और इससे उनकी यूनिट की बदनामी हो रही है।
आये दिन आती है ऐसी शिकायतें
हालात ये है कि एक ओर प्रदेश की बड़ी बड़ी अस्पतालों में लापरवाही के चलते मौतें हो रही है। वहीें दूसरी ओर आये दिन ग्लूकोज बंद करने या ग्लूकोज की बोतल बदलने के लिये नर्सिगकर्मी को बार बार कहने के उपरान्त तुरंत एक्शन नहीं लेने की शिकायतें आने के बाद भी न तो राज्य सरकार और न ही जिला प्रशासन कोई ठोस कदम उठा रहा है। जिसके चलते कई बार अनहोनी तक हो जाती है। इसके बाद भी अस्पताल प्रशासन नहीं चेत रहा है और अपनी मजबूरी बताकर मामले की इतिश्री कर लेता है।

इस तरह का ऑडियो वायरल नहीं करना चाहिए : डॉ. गुप्ता
इस तरह का ऑडियो वायरल नहीं करना चाहिए था। मैंने सभी नर्सिंगकर्मियों के लिए यह बात नहीं बोली, कुछ एक नर्सिंगकर्मी है जो बात नहीं सुनते है।
– डॉ. बी.के.गुप्ता, वरिष्ठ चिकित्सक