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बीकानेर। गणित, विज्ञान, अंग्रेजी जैसे विषयों का पाठ्यक्रम समय पर पूरा नहीं करवाने और विद्यार्थियों को घर पर ट्यूशन के लिए बाध्य करने वाले शिक्षकों की अब खैर नहीं है। शिक्षा निदेशालय ने सरकारी स्कूल के शिक्षकों के ट्यूशन पढ़ाने पर पाबंदी लगा दी है। यदि सरकारी शिक्षक किसी कोचिंग सेंटर में स्कूल समय के बाद निशुल्क सेवाएं भी देता है, तो उसे संस्था प्रधान से अनुमति लेनी होगी। बिना अनुमति के ट्यूशन पढ़ाने की शिकायत मिलने पर जांच के बाद शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने इस आशय के आदेश जारी किए हैं। आदेश के तहत कोई शिक्षक अपने घर या किसी भवन में निशुल्क कोचिंग करवाता भी है, तो संस्था प्रधान की स्वीकृति के साथ ही उसे लिखवाना होगा कि व्यक्तिगत ट्यूशन नहीं पढ़ाया जाता है। यह इसलिए किया जा रहा है ताकि सरकारी स्कूल के शिक्षक बच्चों पर ट्यूशन के लिए दबाव नहीं बना सके।
दहेज के साथ ट्यूशन नहीं पढ़ाने की शपथ
नवनियुक्त सभी सरकारी टीचर्स को अब तक नियुक्ति के समय शपथ-पत्र में न दहेज लेने और न देने का संकल्प लेना होता था लेकिन अब उन्हें यह भी लिखकर देना होगा कि वे न तो ट्यूशन पढ़ाते हैं और न ही किसी कोचिंग सेंटर में पढ़ाने के लिए जाते हैं।
इन विषयों में शिकायतें
आमतौर पर गणित, अंग्रेजी, विज्ञान, वाणिज्य जैसे विषयों के विद्यार्थियों में ट्यूशन की प्रवृति अधिक रहती है। इसका बड़ा कारण यह भी होता है कि संबंधित शिक्षक स्कूल में कोर्स पूरा नहीं कराते और मजबूरी में विद्यार्थियों को ट्यूशन करनी पड़ती है।
अब हर माह देनी होगी रिपोर्ट
शिक्षा निदेशालय के आदेश विषय अध्यापकों को ध्यान में रखते हुए जारी किए गए हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि कई बार देखने को मिलता है कि कठिनतम विषय का पाठ्यक्रम ट्यूशन में विद्यार्थियों को बुलाने के लिए अधूरा रखा जाता है। आदेश में विषय अध्यापक की जिम्मेदारी तय की गई है कि वह प्रतिमाह निर्धारित पाठ्यक्रम पूरा कराएंगे और संस्था प्रधान भी इसकी मॉनिटरिंग करेंगे।