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बीकानेर। अनियमितताओं के कारण सालों से सुर्खियों में रहे बीकानेर इंजीनियरिंग कॉलेज फिर से सुर्खियों में है। विगत माह 22 करोड़ के गबन का मामला प्रकाश में आने के बाद हरकत में आए जिला प्रशासन ने जांच अधिकारी की नियुक्ति कर तत्काल जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए। लेकिन दो माह से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी जांच अधिकारी संजय बंसल की ओर से रिपोर्ट पेश न करना भी चर्चा का विषय बना हुआ है। बताया जा रहा है कि जांच अधिकारी जान बुझकर मामले को लटकाने में लगे हुए है। इस प्रकरण को लेकर अधिवक्ता सुरेश गोस्वामी ने जिला कलक्टर को अप्रेल में सर्तकता में शिकायत की। जिसके बाद जिला कलक्टर ने एक आदेश क्रमांक/सीबी/सतर्कता/पीजी 7/ 2019 निकालकर रजिस्ट्रार संजय बंसल को कार्यवाही कर अविलम्ब रिपोर्ट भेजने को कहा था। लेकिन एक माह बाद भी न तो संजय बंसल ने कोई रिपोर्ट दी है और न ही इस मामले से प्रशासन को अवगत कराया है। इससे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि जांच अधिकारी मामले को ठंडे बस्ते में डालना चाह रहे है।
ये है मामला

अभी हाल ही में निधि अंकेक्षण विभाग की ओर से कॉलेज की वार्षिक ऑडिट की गई थी। उन्हें आरटीआई के जरिए मिली जानकारी व ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार पिछले 15 वर्षो में कॉलेज के प्राचार्य पद पर रहे अलग- अलग लोगों ने 22 करोड़ का घपला किया है। इस ऑडिट रिपोर्ट में कॉलेज के संसाधनों की खरीद फरोख्त, आयोजनों, शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक कार्मिकों को देय वेतन समेत अनेक वित्तीय मामलों में भारी अनियमिताएं उजागर हुई हैं. इनमें से ज्यादातर खर्चों का मिलान भी रोकड़ पुस्तिका और बैंक खाते से नहीं हुआ। ऑडिट रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि कॉलेज का मूलभूत दस्तावेज रोकड़ पुस्तिका व बैंक पुस्तिका हस्तलिखित न होकर कम्प्यूटरीकृत हैं जो किसी अधिकारी द्वारा प्रमाणित व हस्ताक्षरित नहीं होना पाई गई। इसके अलावा रोकड़ पुस्तिका व बैंक पुस्तिका में दर्ज वाउचरों की नंबरिग में भारी हेराफेरी पाई गई है।
रिकवरी के हो रखे है आदेश
जानकारी में रहे कि करोड़ों रूपये के गबन के मामले में तकनीकी विभाग ने दस करोड़ की रिकवरी निकाल रखी है। जो भी अभी तक नहीं हो पाई है।