श्रम आयुक्त ने मांगी रिपोर्ट, आचार संहिता में चार करोड़ की वसूली
बीकानेर।
करीब एक लाख पंजीकृत निर्माण श्रमिकों वाले बीकानेर जिले से श्रम विभाग ने एक साल में करीब पन्द्रह करोड़ रुपए का लेबर सेस वसूल करने में सफलता हासिल की है। गत वर्षों की तुलना में इस बार लेबर सेस अधिक होने के कारण अधिकारी प्रसन्न है लेकिन श्रम आयुक्त अब भी वसूली की उम्मीद में श्रम निरीक्षकों को टारगेट दे रहे हैं। स्थिति यह है कि संभागीय अतिरिक्त श्रम आयुक्त कार्यालय के कार्मिक विगत दो माह से केवल निर्माण सेस वसूलने का काम ही कर रहे हैं, जबकि जिन श्रमिकों का निर्माण सेस पर अधिकार है, उन्हें आचार संहिता के नाम पर वंचित किया जा रहा है।
श्रम विभाग के अंतर्गत पहले पंचायत समिति स्तर पर पृथक से आवेदन आते थे, जिनकी जांच व भुगतान का कार्य पंचायत समितियों की ओर से किया जाता था। तीन माह पहले श्रम विभाग ने पंचायत समितियों से काम अपने हाथ में ले लिया लेकिन उसके बाद से श्रमिकों को लाभ नहीं दिया गया। पहले विधानसभा चुनाव की आचार संहिता में आवेदनों की जांच नहीं की गई और बाद में श्रम आयुक्त के नियोजक प्रमाण-पत्र के नए प्रारूप का बहाना बनाकर आवेदनों को लम्बित किया गया।
सरकारी विभागों के भरोसे श्रम विभाग
निर्माण सेस को लेकर श्रम विभाग वर्षों से सरकारी विभागों के भरोसे ही अपना लक्ष्य पूरा करता आ रहा है। नगर निगम, नगर विकास न्यास, सार्वजनिक निर्माण विभाग व अन्य सरकारी एजेंसियों के माध्यम से होने वाले निर्माण कार्यों के भुगतान के समय एक प्रतिशत राशि संबंधित विभाग काटकर ठेकेदार को भुगतान करता है। वह राशि सीधे श्रम विभाग को बिना परिश्रम के मिल जाती है।
सबसे ज्यादा रेलवे से मिला
स्थानीय श्रम विभाग को बीकानेर जिले में सबसे अधिक राजस्व रेलवे के माध्यम से ही मिल रहा है। रेलवे में चलने वाले कार्यों पर एक प्रतिशत निर्माण सेस मिलने के कारण करोड़ों रुपए विभाग को एक साल में रेलवे से मिले हैं और विगत कई सालों से यह क्रम चल रहा है।
देने के नाम पर खींचे हाथ
जहां सरकारी निर्माण कार्यों से श्रम विभाग प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए राजस्व प्राप्त कर रहा है, वहीं निर्माण श्रमिकों को भुगतान के समय विभाग हाथ खींच रहा है। जानकारों की मानें, तो विगत चार माह में इक्का-दुक्का श्रमिकों को ही भुगतान हो पाया है, जबकि इसके लिए भी नियोजक प्रमाण-पत्र देने वाले को नोटिस थमाकर सूचनाएं मांगी गई।