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बीकानेर के मतदाताओं की नब्ज टटोलने आ रहे पीएम मोदी
बीकानेर।
बीकानेर के रसगुल्लों की ‘मिठासÓ तथा नमकीन का ‘चरकासÓ व ‘चटपटाÓ स्वाद देश में ही नहीं, बल्कि सात समुन्दर पार तक प्रसिद्ध है। ‘रसगुल्लोंÓ की तरह बीकानेर के लोगों में मिठास है तो नमकीन की तरह ‘चरकासÓ भी है। लोकसभा चुनाव का इतिहास गवाह है कि शुरुआती दौर में महाराजा डॉ. करणीसिंह के अपवाद को छोड़ दें तो कभी भी किसी भी उम्मीदवार को लगातार तीसरी बार जीता कर उसको लोकसभा में नहीं भेजा है। यहां के लोग चुनाव में प्रत्याशी व जनप्रतिनिधियों को अपने पलक पावड़ों पर बिठाकर उनका मान-सम्मान करते है तो समय आने पर उम्मीदवारों व जनप्रतिनिधियों को आइना दिखाना भी नहीं भूलते। सही मायने में यही स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान व तरीका है।
सिर्फ दो बार से अधिक नहीं
1952 से लेकर 2014 तक सम्पन्न हुए लोकसभा के सोलह चुनावों में शुरुआती दौर पूरी तरह से महाराज डॉ. करणी सिंह के नाम रहा है। उन्होंने 1952 से लेकर 1971 तक लगातार पांच बार निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीते थे। इसके अलावा 1980 से लेकर 1988 तक हुए दो लोकसभा चुनाव कांग्रेस प्रत्याशी मनफूल सिंह भादू ने जीते थे। किंतु तीसरे चुनाव में उनको हार का मुंह देखना पड़ा था। इसी प्रकार से 2009 व 2014 को हुए चुनाव में लगातार भाजपा से अर्जुनराम मेघवाल ने चुनाव जीते है।
किसी से कोई सरोकार नहीं
बीकानेर के प्रसिद्ध रसगुल्लों व नमकीन के गुण भी यहां के लोगों में विद्यमान है। जिसके कारण एक ओर गंगा-जमुनी जहजीब की नजीर बीकानेर में देखने को मिल रही है तो दूसरी ओर बीकानेर के मतदाताओं का किसी भी पार्टी विशेष, प्रत्याशी या फिर जनप्रतिनिधि से किसी प्रकार का कोई सरोकार नहीं है। वे तो अपने स्वयं विवेक से लोकतंत्र के महोत्सव में अपने मत की आहुति देने से नहीं चूकते। इस बार छह मई को होने वाले चुनाव के परिणाम ही बीकानेर के लोगों के इस स्वभाव को बताएगा। किंतु हाल फिलहाल जो चुनाव को लेकर तस्वीर बनी हुई है। वह काफी धुंधली सी नजर आ रही है। मतदाता खामोश है।
चुनावी नैया के खवैया
बीकानेर लोकसभा सीट पर कांग्रेस के प्रत्याशी मदन गोपाल मेघवाल की चुनावी नैया प्रदेश स्तर के स्टार प्रचारकों के भरोसे चल रही है तो दूसरी ओर भाजपा प्रत्याशी अर्जुनराम मेघवाल के लिए गृहमंत्री राजनाथ सिंह, प्रवक्ता सुधांशु चतुर्वेदी, 30 अप्रेल को के न्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी और चुनाव प्रचार थमने की पूर्व संध्या पर 3 मई को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चुनाव सभा करने के लिए आ रहे है।
मोर्चे पर कितने सटीक!
हालंाकि श्रीकोलायत के पूर्व विधायक व पूर्वमंत्री रहे देवीसिंह भाटी ने भाजपा प्रत्याशी अर्जुनराम मेघवाल के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। भाटी इस मोर्चे पर कितने सटीक व सफल हो पाते है। यह तो बहरहाल आने वाली 23 मई को मतगणना के बाद ही पता चलेगा। किंतु इससे भाजपा प्रत्याशी अर्जुनराम की मुश्किलें बढ़ गई है तो सामने भी कांग्रेस प्रत्याशी के प्रचार के लिए भी कोई स्टार प्रचारक नहीं है। दूसरी ओर पूरी सरकार वैभव गहलोत को जीतने के लिए जोधपुर में डेरा डाले बैठी है। जिसके चलते प्रदेश में शेष कांग्रेस प्रत्याशी अपने ही बलबूते पर दमखम लगा रहे है।
भाजपा को भी आभास!
2009 में चुनाव जीतने के बाद भाजपा के आईएएस अर्जुनराम मेघवाल ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने लोकसभा के अलावा अपने क्षेत्र के मतदाताओं में भी अपनी विशेष पहचान बनाई थी। जिसके चलते वर्ष 2014 के चुनाव में लोगों ने उनको अब तक की सबसे बड़ी जीत दिलाई। किंतु इस बार चहुंओर से घिरे अर्जुन की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है।